धमतरी जिले में आयोजित जिला संवाद कार्यक्रम में विकास के मुद्दों पर खुलकर चर्चा हुई। INH-हरिभूमि के प्रधान संपादक डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने कुरुद विधायक अजय चंद्राकर से जिले की जमीनी स्थिति पर सीधे सवाल किए। कार्यक्रम का उद्देश्य था—धमतरी के विकास की वास्तविक स्थिति को जनता के सामने रखना।
25 साल बाद भी ऑडिटोरियम क्यों नहीं?
संवाद की शुरुआत राज्य गठन के 25 साल बाद भी धमतरी में आधुनिक ऑडिटोरियम नहीं होने के मुद्दे से हुई। इस पर अजय चंद्राकर ने कहा कि यह एक कमी जरूर है, लेकिन ऑडिटोरियम की घोषणा हो चुकी है और काम प्रक्रिया में है। उन्होंने पिछले पांच वर्षों को “डार्क एज” बताते हुए कहा कि उस दौरान विकास की रफ्तार प्रभावित हुई।
क्या कुरुद विधायक होने से धमतरी की उपेक्षा?
डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने सवाल उठाया कि क्या कुरुद से विधायक होने के कारण धमतरी को नुकसान हुआ?
इस पर अजय चंद्राकर ने इसे “राजनीतिक नैरेटिव” करार दिया। उन्होंने कहा कि प्रभारी मंत्री रहते धमतरी को नगर निगम का दर्जा मिला, पेयजल योजनाएं आईं और बायपास की घोषणा हुई। उनके अनुसार, जिले में कई बुनियादी सुविधाएं पहले से मौजूद हैं।
मेडिकल कॉलेज पर सीधा जवाब
संवाद का अहम मुद्दा मेडिकल कॉलेज रहा। सवाल उठा कि जिले में अब तक मेडिकल कॉलेज क्यों नहीं खुल पाया।
विधायक ने जवाब दिया कि मेडिकल कॉलेज खोलना केवल मांग का विषय नहीं, बल्कि यह बजट और नीति से जुड़ा बड़ा फैसला है। इसके लिए भारी वित्तीय प्रावधान और प्रशासनिक प्रक्रिया जरूरी होती है। भविष्य में परिस्थितियां अनुकूल होने पर इस पर विचार संभव है।
इंडस्ट्रियल एरिया एक “गैप”
धमतरी में औद्योगिक क्षेत्र की कमी को लेकर भी चर्चा हुई। अजय चंद्राकर ने माना कि इंडस्ट्रियल एरिया की जरूरत है और इसके लिए राजनीतिक व सामाजिक सहमति बनाना आवश्यक है।
भाजपा सरकार के दो साल का रिपोर्ट कार्ड
कार्यक्रम के अंत में राज्य सरकार के दो साल के कार्यकाल पर चर्चा हुई। विधायक ने प्रधानमंत्री आवास योजना, सिंचाई कनेक्शन, सड़क परियोजनाएं और रेललाइन विस्तार को बड़ी उपलब्धियां बताया। वहीं, डॉ. हिमांशु द्विवेदी ने जनता के विश्वास और जमीनी असर को लेकर सवाल उठाए।
विकास पर मंथन, राजनीति भी केंद्र में
कुल मिलाकर, जिला संवाद कार्यक्रम केवल राजनीतिक बयानबाजी तक सीमित नहीं रहा, बल्कि धमतरी के विकास, योजनाओं और भविष्य की दिशा पर गंभीर चर्चा का मंच बना। सवाल अभी भी बरकरार हैं—घोषणाएं कब तक जमीन पर उतरेंगी और धमतरी को कब मिलेगी बहुप्रतीक्षित सुविधाएं?